Select Page

MP Lok Sabha Election 4th Phase: प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के 10 वर्ष या कांग्रेस की आधी सदी में कौन बेहतर, तय करेंगे आदिवासी मतदाता

MP Lok Sabha Election 4th Phase: प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के 10 वर्ष या कांग्रेस की आधी सदी में कौन बेहतर, तय करेंगे आदिवासी मतदाता

मध्य प्रदेश लोकसभा चुनाव 2024 : मालवा-निमाड़ अंचल की आठ सीटों में से धार, रतलाम और खरगोन अनुसूचित जनजाति वर्ग के लिए सुरक्षित।

By Prashant Pandey

Publish Date:

Sun, 12 May 2024 07: 50: 33 PM (IST)

Updated Date:

Sun, 12 May 2024 07: 54: 00 PM (IST)

MP Lok Sabha Election 4th Phase: प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के 10 वर्ष या कांग्रेस की आधी सदी में कौन बेहतर, तय करेंगे आदिवासी मतदाता

HighLights

  1. खंडवा लोकसभा क्षेत्र में भी आदिवासी मतदाताओं की निर्णायक भूमिका।
  2. प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी इस चुनाव में खरगोन और धार सीट पर प्रचार के लिए आए थे।
  3. कांग्रेस नेता राहुल गांधी भी रतलाम और खरगोन सीट पर प्रचार करके गए हैं।

MP Lok Sabha Election 4th Phase: राज्य ब्यूरो, नईदुनिया, भोपाल। मध्य प्रदेश में तीन चरणों में 21 संसदीय सीटों में मतदान हो चुका है। चौथे और अंतिम चरण में मालवा-निमाड़ के आठ लोकसभा क्षेत्रों में सोमवार को मतदान होगा। इसमें तीन सीटें अनुसूचित जनजाति (एसटी) वर्ग के लिए सुरक्षित हैं और चौथी सीट खंडवा में भी यह वर्ग निर्णायक स्थिति में है। इन चारों सीटों में आदिवासी वर्ग तय करेगा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का 10 वर्ष का कार्यकाल बेहतर रहा कि कांग्रेस का करीब आधी सदी का केंद्र का शासन।

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी इस चुनाव में खरगोन और धार सीट पर प्रचार के लिए आए थे और कांग्रेस नेता राहुल गांधी भी रतलाम और खरगोन सीट पर प्रचार करके गए हैं। दरअसल, पिछले कुछ वर्षों में आदिवासी वर्ग के लिए मोदी सरकार ने जो कार्य किए, वह कांग्रेस आधी सदी में नहीं कर पाई। आदिवासी वर्ग के लोगों का भी मानना है कि उनके जननायकों को भाजपा ने पहचान के साथ सम्मान भी दिया, लेकिन कांग्रेस ने उनकी गौरवगाथा को कभी स्वीकार नहीं किया।

जबकि, भाजपा सरकार में जनजातीय नायक बिरसा मुंडा की जयंती को जनजातीय गौरव दिवस के रूप में मनाने की बात हो, हबीबगंज रेलवे स्टेशन का नाम बदलकर रानी कमलापति स्टेशन करना हो, जबलपुर में रघुनाथ शाह-शंकर शाह का स्मारक और संग्रहालय बनाना हो, टंट्या मामा की जन्मस्थली का विकास करना हो या फिर पेसा अधिनियम के नियम बनाकर उन्हें क्रियान्वित करना हो, इसके माध्यम से इस वर्ग को सकारात्मक संदेश देने का काम किया गया। आदिवासी मतदाताओं का और झुकाव विधानसभा चुनाव में भाजपा की ओर हुआ है।

naidunia_image

उधर, कांग्रेस ने भी आदिवासी वर्ग को साधने में कोई कसर नहीं रखी। राहुल गांधी की प्रदेश में जो पांच सभाएं हुईं, उनमें चार (मंडला, शहडोल, रतलाम और खरगोन) आदिवासी क्षेत्रों में ही हुईं। आदिवासी बहुल क्षेत्रों को अनुसूची पांच में शामिल करने और वनाधिकार पट्टे की बात उठाई। भारत जोड़ो न्याय यात्रा में भी धार के बदनावर पहुंचकर आदिवासी बनाम वनवासी और हिस्सेदारी का मुद्दा उठाया।

आदिवासी मतदाताओं का महत्व समझते हुए दोनों दलों के शीर्ष नेतृत्व का फोकस इन्हीं सीटों पर रहा। उधर, इंदौर में कांग्रेस प्रत्याशी की गैर मौजूदगी ने चुनाव को नीरस बना दिया है। वहीं, मंदसौर, उज्जैन और देवास लोकसभा सीट में भी भाजपा ने आक्रामक प्रचार करते हुए कांग्रेस के लिए कड़ी चुनौती पेश की है। अनुकूल परिस्थिति के बीच भाजपा के सामने बड़ी चुनौती अधिक से अधिक मतदान कराने की है।

  • ABOUT THE AUTHOR
    Author

    नईदुनिया डॉट कॉम इंदौर में मध्य प्रदेश-छत्तीसगढ़ डेस्क पर वरिष्ठ उप-संपादक। पत्रकारिता और जनसंचार में देवी अहिल्या विश्वविद्यालय इंदौर से बैचलर और विक्रम विश्वविद्यालय उज्जैन से मास्टर्स डिग्री। इंदौर में 2014